मजदूरों की वापसी से बढ़ेगा, दबाव लॉकडाउन से परेशानी में राज्य सरकारें

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कोरोना संक्रमण पर अंकुश लगाने के लिए जारी लॉकडाउन से राज्य सरकारों की दिक्कतें बढ़ने लगी हैं। अब प्रवासी मजदूरों के राज्यों में लौटने से दबाव और बढ़ा है। इन मजदूरों को रोजगार और रोटी दोनों उपलब्ध कराने के लिए राज्यों को अतिरिक्त आवंटन की जरूरत है। पहले से ही बंद तमाम उद्योग धंधों से राज्य की आर्थिक स्थितियां खराब हैं और वह इस स्थिति में केंद्र के सहारे हैं। केंद्र में तीन मई के बाद की रणनीति में कामकाज शुरू करने पर खास ध्यान दिया जा रहा है।केंद्र सरकार द्वारा लॉकडाउन के दौरान दी गई तमाम छूटों से रोजमर्रा की जिंदगी में जरूर कुछ आसानी हुई है, लेकिन उससे राज्यों की आर्थिक स्थिति सुधारने की ज्यादा गुंजाइश नहीं है। मौजूदा लॉकडाउन की अवधि तीन मई को समाप्त हो रही है और उसके बाद का फैसला केंद्र सरकार को करना है। चूंकि संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसलिए केंद्र और राज्यों के पास लॉकडाउन पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है। ऐसे में अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए नई रणनीति से अन्य कामकाज को शुरू करने की जरूरत महसूस की जा रही है। राज्यों का कहना है कि अगर केंद्र से आर्थिक मदद नहीं मिली तो वहां पर हालात और बिगड़ सकते हैं।

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मई से ही राज्यों पर ज्यादा दबाव होगा, जबकि केंद्र ने प्रवासी मजदूरों को अपने राज्य में ले जाने की अनुमति दे दी है। लाखों मजदूरों को रोजगार और रोटी बनाने के लिए अतिरिक्त संसाधन व्यय करने होंगे। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार तीन मई के बाद कुछ आर्थिक गतिविधियां शुरू कर सकती है और राज्यों में भी इस तरह के काम शुरू करने को कहा जाएगा। इसके लिए मजदूरों को सीमित संख्या में पूरी सुरक्षा और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के साथ काम में लगाया जाएगा। राज्यों में पहुंच गए मजदूरों को वहीं पर ही काम देने की कोशिश की जाएगी।

गृह मंत्रालय ने गुरुवार को साफ किया कि सामान की आपूर्ति में लगे ट्रकों की अंतरराज्यीय आवाजाही के लिए अलग से किसी पास (अनुमति पत्र) की कोई आवश्यकता नहीं है। मंत्रालय ने कहा है कि ऐसे ट्रक चालकों का लाइसेंस ही काफी है। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि इस तरह की सूचनाएं हैं कि देश के विभिन्न हिस्सों में राज्य की सीमाओं पर ट्रकों को आवाजाही में परेशानी आ रही है और स्थानीय अधिकारी अलग से पास की मांग रहे हैं।

केंद्र की सहमति मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अन्य राज्यों में फंसे लोगों को सुरक्षित वापस लाने के लिए अभियान तेज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अब इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। पहले चरण में जल्द गुजरात, उत्तराखंड व राजस्थान से श्रमिकों को लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने संबंधित राज्य सरकारों से प्रवासी श्रमिकों के नाम, पते, टेलीफोन नम्बर तथा स्वास्थ्य परीक्षण की स्थिति सहित सम्पूर्ण विवरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

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लॉकडाउन के कारण विभिन्न राज्यों में फंसे मजदूरों,छात्रों और तीर्थयात्रियों को घरों तक पहुंचाने के लिए राज्यों ने तैयारी शुरू दी है। हालांकि बिहार, पंजाब, तेलंगाना और केरल ने केंद्र सरकार से लोगों को लाने के लिए विशेष ट्रेन चलाने की मांग की। राज्यों ने कहा है कि लोगों की संख्या काफी है। ऐसे में बसों से इन लोगों को घरों तक पहुंचाने में काफी समय लग जाएगा। वहीं, संक्रमण का भी खतरा रहेगा, क्योंकि कई राज्यों से होकर आना होगा।


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