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Saturday, October 24, 2020
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700 साल से भी पुराना है ‘क्वारंटीन’ का इतिहास, पहली बार इस शहर में हुआ था लागू

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By BBC HINDI

प्राचीन काल से ही संक्रामक बीमारियों के रोगियों को स्वस्थ व्यक्तियों से दूर रखने की कोशिशें होती रही हैं, ओल्ड टेस्टामेंट में भी सेल्फ-आइसोलेशन का उल्लेख है। दुनिया भर में कोविड -19 के फैलने के बाद से यही सलाह दी जा रही है कि अगर आप कहीं विदेश से आए हैं या ऐसे किसी व्यक्ति के संपर्क में आए हैं जिसे कोविड-19 हुआ हो तो सेल्फ-क्वारंटीन में रहें। आज की इस महामारी के समय में सेल्फ-क्वारंटीन का महत्व समझने के लिए ‘क्वारंटीन’ शब्द का इतिहास जाननादिलचस्प रहेगा। इस शब्द का मूल छिपा है मध्यकालीन यूरोप में।

‘क्वारंटीन’ शब्द इटैलियन भाषा के ‘क्वारंतीनो’ शब्द से निकला है, जिसका अर्थ है चालीस दिन की अवधि। 14वीं शताब्दी में यूरोप में फैले प्लेग से वेनिस जैसे तटीय शहरों को बचाने के लिए संक्रमित बंदरगाहों से वहां पहुंचने वाले हर जहाज को शहर की धरती छूने से पहले 40 दिन तक पानी में ही लंगर डालकर खड़े रहना पड़ता था यानी उन्हें अपनी यात्रा 40 दिन तक रोकनी पड़ती थी (क्वारंता- जौर्नी: क्वारंता यानी चालीस और जौर्नी यानी यात्रा)। धीरे-धीरे इस परिपाटी को क्वारंटीन कहा जाने लगा।

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साल 1377 में एक नया कानून

वर्ष 1374 में वेनिस ने एक आदेश निकाला कि जब तक वेनिस की विशेष स्वास्थ्य परिषद, जहाजों और उसके यात्रियों को शहर में आने की अनुमति न दे दे, उन्हें पास के सेन लैजारो द्वीप में ही रहना होगा। लेकिन जैसा कि ‘लैजरेटो इन ड्यूब्रोन्विक : द बिगनिंग ऑफ द क्वारंटीन रेग्युलेशन इन यूरोप’ के सह-लेखक एंटे मिलोसेविच, पीएचडी लिखते हैं, ‘इसके कारण वेनिस में कुछ विशेष देशों के जहाजों और यात्रियों के साथ भेदभाव तथा अन्य गड़बड़ियां शुरू हो गईं।’

उधर, एड्रीयाटिक सागर के पार रागुजा (आधुनिक ड्यूब्रोन्विक) की महापरिषद ने महामारी को फैलने से रोकने के लिए 1377 में एक नया कानून बनाया, जिसके मुताबिक रागुजा आने वाले हर जहाज और व्यापारियों के काफिले को 30 दिन तक आइसोलेशन में रहना था। इस कानून में कहा गया था कि हानिकारक इलाकों से आने वाले हर व्यक्ति को मुख्य शहर में प्रवेश करने से पहले खुद को संक्रमणमुक्त बनाने के लिए नजदीकी सेवतट कस्बे या म्र्कान द्वीप में 30 दिन बिताने होंगे।

इस प्रकार, जैसा कि मिलोसेविच कहते हैं, ‘ड्यूब्रोन्विक ने सबसे पहले एक ऐसा तरीका लागू किया जो न केवल पक्षपातरहित और न्यायोचित था, बल्कि बेहद समझदारी भरा और सफल भी साबित हुआ। इसे पूरी दुनिया ने अपनाया।’

दो जरूरी बातें- आइसोलेशन और अनुशासन

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किताब की सह-लेखिका एना बाकीजा-कोंसुआ, एमडी-पीएचडी कहती हैं, ‘ड्यूब्रोन्विक, संक्रमित इलाकों से जलमार्ग और थलमार्ग, दोनों के रास्ते आने वाले लोगों, पशुओं और सामान को स्वस्थ आबादी से अलग रखने वाला मध्य सागर का पहला बंदरगाह था, जबकि वेनिस ने सभी जहाजों और व्यापार पर रोक लगा दी जिससे वहां का जीवन थम-सा गया। रागुजा गणतंत्र ने 30 दिन के इस क्वारंटीन कानून (जिसे ड्यूब्रोन्विक के 27 जुलाई 1377 के एक दस्तावेज में ट्रेंटीन कहा गया है) का उल्लंघन करने पर कठोर दंड दिए और जुर्माने लगाए। शुरू में आइसोलेशन की अवधि 30 दिन ही थी, लेकिन फिर इसे 40 दिन का कर दिया गया।’

ऐसा करने की सही-सही वजह कोई नहीं जानता। कुछ लोग मानते हैं कि 30 दिन की अवधि नाकाफी समझी गई, क्योंकि बीमारी के इंक्यूबेशन अवधि की सही जानकारी नहीं थी, तो कुछ इसे ईस्टर से पहले के 40 दिनों के व्रत (लेंट सीजन) से जोड़ते हैं।

वहीं कुछ का मानना है 40 दिन की अवधि बाइबिल की महत्वपूर्ण घटनाओं जैसे महाप्रलय के चालीस दिन, हजरत मूसा के माउंट सिनाय पर बिताए चालीस दिन आदि पर आधारित है। वेनिस की सीनेट ने 1448 में अपने बंदरगाह में प्रवेश करने वाले जहाजों के लिए क्वारंटीन की अवधि आधिकारिक रूप से 30 दिन से बढ़ाकर 40 दिन कर दी।

यूरोप का पहला अस्थायी प्लेग अस्पताल

लेजरेटो ऑफ ड्यूब्रोन्विक में बाकीजा-कोंसुआ लिखती हैं, ‘ड्यूब्रोन्विक प्रशासन को क्वारंटीन का विचार कुष्ठ रोग फैलने से रोकने के लिए कुष्ठ रोगियों को दूसरों से अलग रखने के उनके अनुभव से आया था।’ ड्यूब्रोन्विक के इतिहास में कई रोगों ने तबाही मचाई थी, जिसमें कुष्ठ रोग और प्लेग जन-स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित हुए।

एतिहासिक तथ्यों के अनुसार ‘क्वारंटीन’ की अवधारणा ड्यूब्रोन्विक की ही देन है। 1272 के ‘स्टेच्युट ऑफ ड्यूब्रोन्विक’ में पहली बार कुष्ठ रोगियों को आइसोलेशन में रखे जाने का उल्लेख है। यह स्टेच्युट क्रोएशिया के प्राचीनतम कानूनी दस्तावेजों में से एक है। बाकीजा-कोंसुआ यह भी बताती हैं कि बाइबिल में कुष्ठ रोग से पीड़ित ‘लैजरस’ को कुष्ठ रोगियों का संरक्षक संत माना गया है और उन्हीं के नाम पर कुष्ठ रोगियों के लिए बने आवासों को लैजरेटो कहा गया। रागुजा प्रशासन द्वारा म्ल्जेत में यूरोप का पहला अस्थायी प्लेग अस्पताल बनाए जाने के बाद यूरोप भर में क्वारंटीन केन्द्रों को लैजरेटो कहा जाने लगा।

क्वारंटीन परिसर की स्थापना

बाकीजा-कोंसुआ बताती हैं, ‘रागुजा के 1377 के आइसोलेशन कानून के बाद ड्यूब्रोन्विक के दक्षिण-पश्चिम में स्थित छोटे से कस्बे सेवतट और आस-पास के द्वीपों (सुपेतर, म्र्कान और बोबारा) में सबसे पहले क्वारंटीन लागू किया गया। शुरुआत में क्वारंटीन की व्यवस्था झोंपड़ियों, तंबुओं और कई बार खुले में की गई। झोपड़ियों के साथ अच्छी बात यह थी कि उन्हें आसानी से जलाकर पूरे इलाके को विसंक्रमित किया जा सकता था।’

1397 में म्ल्जेत द्वीप पर बेनेडिक्टन मठ में एक क्वारंटीन परिसर स्थापित करने का निर्णय लिया गया। डांस बीच के लैजरेटो वर्ष 1430 में बनाए गए और बाद में लोकरम द्वीप पर एक बड़े और ज्यादा आधुनिक लैजरेटो का निर्माण किया गया। 12 फरवरी 1590 को ड्यूब्रोन्विक की सीनेट ने पुराने शहर के पूर्वी प्रवेश द्वार पर प्लोस में अंतिम लैजरेटो बनाने का आदेश दिया। इसका निर्माण 1647 में पूरा हुआ। 1724 में सीनेट ने इसे शहर की बाहरी दीवार का एक अभिन्न हिस्सा घोषित कर दिया।

पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र
लैजरेटो परिसरों का क्वारंटीन केंद्र के रूप में इस्तेमाल ड्यूब्रोन्विक गणतन्त्र के पतन के बाद भी जारी रहा। स्वास्थ्य केंद्र के रूप में इसका इस्तेमाल कब बंद हुआ, हम कह नहीं कह सकते। बाकीजा-कोंसुओ बताती हैं कि ड्यूब्रोन्विक के राष्ट्रीय अभिलेखों के अनुसार 1872 के आस-पास ऐसा हुआ होगा। वे कहती हैं, ‘पत्थरों से निर्मित यह शानदार इमारत स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना तो है ही, ड्यूब्रोन्विक की अनूठी चिकित्सीय विरासत की भी साक्षी है।’

आज ड्यूब्रोन्विक के ये क्वारंटीन परिसर यानी लैजरेटो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं और आजकल यहां कॉन्सर्ट और लिंदो जैसे पारंपरिक लोक नृत्यों का आयोजन किया जाता है। ये परिसर इस बात के गवाह हैं कि इस शहर ने सदियों पहले संक्रामक रोगों से लड़ने में कितनी दूरदर्शिता दिखाई थी।

ड्यूब्रोन्विक शहर में पले-बढ़े एतिहासिक टूर गाइड इवान वुकोविच वुका बताते हैं कि वे गर्मी की रातों में इन परिसरों में होने वाले आयोजनों में सिर्फ इसलिए जाते थे ताकि ठंडी हवा का आनंद उठा सकें। लैजरेटो पुराने शहर की दीवारों से 300 मीटर बाहर की तरफ हैं। वे कहते हैं, ‘शहर की दीवारों के अंदर किसी भी तरह की बीमारी बहुत आसानी से फैल सकती है, इसीलिए लैजरेटो परिसर बहुत बड़ा और खुला-खुला है। यह क्षेत्र 10 बहुमंजिला इमारतों में बंटा है, इसलिए काफी हवादार है।’

आज हैं खाली सड़कें

लैजरेटो परिसर में 10 क्वारंटीन भवन, पांच आंगन और दो गार्ड हाउस हैं। भवनों में छोटे-छोटे टेरेस भी हैं जहां क्वारंटीन यात्री ताजी हवा ले सकते थे। लैजरेटो इन ड्यूब्रोन्विक की सह-लेखिका वेसना मिलोसेविच बताती हैं, ‘वे लैजरेटो परिसर के ऊपरी हिस्से में टहल सकते थे, लेकिन ऐसे किसी भी व्यक्ति से नहीं मिल सकते थे जिसका क्वारंटीन पूरा हो गया हो या जो लैजरेटो परिसर से बाहर रहता हो।’

आज कोविड-19 के कारण तमाम दुनिया की तरह ड्यूब्रोन्विक शहर भी क्वारंटीन है। क्रोएशियाई अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा और ड्यूब्रोन्विक की आय का एक प्रमुख स्रोत पर्यटन थम गया है। सागर में क्रूज शिप खड़े हैं और मार्च 2020 में वायरस को फैलने से रोकने के लिए क्रोएशिया में सीमा पार आने-जाने पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया है।

वुकोविच वुका कहते हैं, ‘सभी सीमाएं बंद हैं- आज क्रोएशिया में आप एक शहर से दूसरे शहर भी नहीं जा सकते। अमेरिकन एयरलाइंस ने पिछले ही साल एक नए मार्ग से उड़ान शुरू की थी और दोनों देशों के बीच 28 साल के बाद कोई सीधी उड़ान शुरू हुई थी, लेकिन अब यह उड़ान इस पूरे वर्ष यानी 2020 के लिए रद्द कर दी गई है। अन्य यूरोपीय अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी जून 2020 तक बंद हैं।’ वुका कहते हैं, ’90 के दशक के युद्धकाल में भी ड्यूब्रोन्विक इस कदर खाली नहीं होता था। आप खामोशी की आवाज सुन सकते हैं।’

एक-दूसरे से जुड़े दो बंदरगाह

लेकिन गनीमत यह है कि शहर के मध्यकालीन क्वारंटीन कानून के उलट अब लोगों के पास अपने घर पर ही सेल्फ-क्वारंटीन रहने की सुविधा है। बस, जैसा कि वुका कहते हैं, ‘क्रोएशियाई बड़े समुदायों में अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी के साथ रहने के आदी हैं, ऐसे में संक्रमण से बचाव के लिए थोड़ा-ज्यादा ध्यान रखना जरूरी है।’

लेकिन इसके अलावा क्वारंटीन के प्रोटोकॉल में आज भी ज्यादा बदलाव नहीं आया है। ड्यूब्रोन्विक ने सदियों पहले जिस मंत्र को अपनाया था, वह आज भी सही है और पूरी दुनिया को उसका पालन करना चाहिए कि – ‘आइसोलेशन और अनुशासन दो बेहद जरूरी बातें हैं’।

वेनिस की ही तरह ड्यूब्रोन्विक (पहले रागुजा के नाम से मशहूर) भी दुनिया भर के यात्रियों में लोकप्रिय रहा है, आज दोनों ही शहर यूनेस्को के विश्व विरासत स्थल हैं। मध्य युग में वेनिस और रागुजा बड़े व्यापारिक पत्तन थे जिनका इतिहास एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। सन 1205 से 1385 तक रागुजा ने वेनिस का आधिपत्य स्वीकार किया, लेकिन ज्यादातर मामलों में अपनी स्वतंत्रता बनाए रखी। वर्ष 1420 में जब डलमेशिया (एड्रीयाटिक सागर से लगा तटीय क्षेत्र, जिसका अधिकांश हिस्सा अब क्रोएशिया में है) वेनिस को बेच दिया गया, तब भी ड्यूब्रोन्विक की स्वतंत्र सत्ता बनी रही, वह सिर्फ नाममात्र को ही वेनिस के अधीन था।

Coppy


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